धातु एवं अधातु (Class 10 Science Notes in Hindi)

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कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय “धातु एवं अधातु” रसायन विज्ञान का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें हम पदार्थों के मूलभूत वर्गीकरण और उनके गुणधर्मों को समझते हैं। इस अध्याय के माध्यम से छात्र यह जान पाते हैं कि धातु और अधातु क्या होते हैं, उनके भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म क्या हैं, वे प्रकृति में कैसे पाए जाते हैं और उन्हें कैसे प्राप्त किया जाता है। इसके साथ ही इस अध्याय में संक्षारण, मिश्रधातु, धातुओं का निष्कर्षण तथा आयनिक यौगिकों के गुणों का भी विस्तृत अध्ययन किया जाता है। यह अध्याय बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ दैनिक जीवन की समझ के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

पाठ्यपुस्तकNCERT
कक्षा10वीं
विषयविज्ञान
अध्याय का नामधातु एवं अधातु
माध्यमहिंदी
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Class 10th NotesAll Subjects
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JAC Portal Websitewww.jacportal.com

तत्वों का वर्गीकरण

वर्तमान में लगभग 118 तत्व ज्ञात हैं, जिनमें अधिकांश धातुएँ, कुछ अधातुएँ और कुछ उपधातु शामिल हैं। तत्वों को उनके गुणधर्मों के आधार पर धातु और अधातु में वर्गीकृत किया जाता है। यह वर्गीकरण हमें उनके व्यवहार और उपयोग को समझने में मदद करता है।

धातु क्या हैं

धातु वे पदार्थ होते हैं जो सामान्यतः कठोर, चमकीले, आघातवर्ध्य, तन्य तथा ऊष्मा और विद्युत के अच्छे चालक होते हैं। उदाहरण के रूप में लोहा, ताँबा, एल्युमिनियम और सोना प्रमुख धातुएँ हैं। इन गुणों के कारण धातुओं का उपयोग निर्माण, उद्योग, परिवहन और विद्युत क्षेत्र में व्यापक रूप से किया जाता है।

अधातु क्या हैं

अधातु वे पदार्थ होते हैं जो सामान्यतः भंगुर, मलिन और ऊष्मा एवं विद्युत के कुचालक होते हैं। ये ध्वानिक नहीं होते और विभिन्न अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) में पाए जाते हैं। उदाहरण के रूप में ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर और क्लोरीन प्रमुख अधातु हैं। अधातुओं का उपयोग जीवन प्रक्रियाओं, उर्वरकों, औषधियों और जल शोधन में किया जाता है।

धातु और अधातु में अंतर

धातुएँ कठोर, चमकीली और चालक होती हैं, जबकि अधातुएँ सामान्यतः नरम, मलिन और कुचालक होती हैं। धातुओं को पीटकर चादर और खींचकर तार बनाए जा सकते हैं, जबकि अधातुओं में यह गुण नहीं होता। यह अंतर हमें दोनों के उपयोग और व्यवहार को समझने में सहायता करता है।

धातुओं के भौतिक गुणधर्म

धातुओं में कई महत्वपूर्ण भौतिक गुण पाए जाते हैं जैसे कठोरता, धात्विक चमक, आघातवर्ध्यता, तन्यता, ऊष्मा एवं विद्युत चालकता और ध्वानिकता। उदाहरण के लिए, ताँबा और एल्युमिनियम बिजली के तार बनाने में उपयोग होते हैं क्योंकि ये अच्छे चालक हैं। सोना अत्यधिक तन्य होता है, इसलिए उससे पतले तार बनाए जा सकते हैं।

अधातुओं के भौतिक गुणधर्म

अधातु सामान्यतः भंगुर और कुचालक होते हैं। इनमें चमक नहीं होती और इन्हें पीटकर आकार नहीं दिया जा सकता। हालांकि कुछ अपवाद भी हैं, जैसे ग्रेफाइट विद्युत का चालक है और आयोडीन में चमक पाई जाती है।

धातुओं के रासायनिक गुणधर्म

धातुएँ विभिन्न पदार्थों के साथ अभिक्रिया करती हैं और अलग-अलग उत्पाद बनाती हैं। ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करने पर धातु ऑक्साइड बनते हैं:

2Cu + O₂ → 2CuO

इस अभिक्रिया में ताँबा ऑक्सीजन के साथ मिलकर कॉपर ऑक्साइड बनाता है, जो काले रंग का होता है।

धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं:

2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂ + ऊष्मा

इसमें सोडियम जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करता है और हाइड्रोजन गैस निकलती है।

धातुओं की अम्लों के साथ अभिक्रिया

धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं:

Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂

इस अभिक्रिया में जिंक और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलकर जिंक क्लोराइड और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।

सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series)

धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के आधार पर एक क्रम में रखा जाता है, जिसे सक्रियता श्रेणी कहते हैं। इसमें सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ ऊपर और कम अभिक्रियाशील नीचे होती हैं। यह श्रेणी यह निर्धारित करती है कि कौन सी धातु किसे विस्थापित कर सकती है।

आयनिक यौगिकों के गुण

आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन के बीच मजबूत आकर्षण होता है। ये सामान्यतः ठोस, कठोर और उच्च गलनांक वाले होते हैं। ये जल में घुलकर विद्युत का संचालन करते हैं, लेकिन ठोस अवस्था में चालक नहीं होते।

धातुओं की प्राप्ति (Extraction of Metals)

धातुओं की प्राप्ति उनकी सक्रियता पर निर्भर करती है। अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त की जाती हैं, जबकि कम अभिक्रियाशील धातुएँ गर्म करके या अपचयन द्वारा प्राप्त की जाती हैं।

उदाहरण के लिए, जिंक ऑक्साइड का अपचयन:

ZnO + C → Zn + CO

इसमें कार्बन जिंक ऑक्साइड को जिंक में परिवर्तित करता है।

थर्मिट अभिक्रिया

थर्मिट अभिक्रिया में एल्युमिनियम आयरन ऑक्साइड को अपचयित करता है:

Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ + ऊष्मा

यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है और इसका उपयोग रेल पटरियों को जोड़ने में किया जाता है।

धातुओं का परिष्करण

धातुओं को शुद्ध करने के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु को ऐनोड और शुद्ध धातु को कैथोड बनाया जाता है, जिससे शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होती है।

संक्षारण (Corrosion)

जब धातु वातावरण के संपर्क में आकर धीरे-धीरे नष्ट होती है, तो इसे संक्षारण कहते हैं। उदाहरण के लिए लोहे में जंग लगना एक सामान्य प्रक्रिया है। इससे धातुओं की मजबूती कम हो जाती है।

संक्षारण से बचाव

संक्षारण को रोकने के लिए पेंटिंग, ग्रीसिंग, गैल्वनाइजेशन और मिश्रधातु बनाना जैसे उपाय किए जाते हैं। ये विधियाँ धातु को वायु और नमी से बचाती हैं।

मिश्रधातु (Alloy)

दो या दो से अधिक धातुओं के मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। इससे धातुओं के गुणों में सुधार होता है। उदाहरण के लिए स्टील, पीतल और कांसा प्रमुख मिश्रधातुएँ हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points)

धातुएँ अच्छे चालक होती हैं जबकि अधातुएँ सामान्यतः कुचालक होती हैं
धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं
सक्रियता श्रेणी धातुओं की अभिक्रियाशीलता को दर्शाती है
आयनिक यौगिक उच्च गलनांक वाले होते हैं
थर्मिट अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है
संक्षारण से धातुओं को नुकसान होता है

निष्कर्ष (Conclusion)

धातु एवं अधातु अध्याय रसायन विज्ञान की एक महत्वपूर्ण आधारशिला है, जो छात्रों को पदार्थों के गुणधर्मों और उनके उपयोग को समझने में मदद करता है। इस अध्याय के माध्यम से हम यह सीखते हैं कि धातुएँ और अधातुएँ हमारे जीवन में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि इस अध्याय को अच्छे से समझ लिया जाए, तो रसायन विज्ञान के अन्य अध्यायों को समझना बहुत आसान हो जाता है और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।

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Published by
Ravi Kumar, Founder of JAC Portal (Jharkhand), shares latest JAC Board updates, study materials (Class 8–12), and JTET notes to help students with accurate and useful information.

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