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Types of Assessment JTET Notes [आकलन के प्रकार]

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शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) में केवल विद्यार्थियों (Students) को पढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह जानना भी आवश्यक होता है कि उन्होंने कितना सीखा, कैसे सीखा तथा उन्हें किन क्षेत्रों (Areas) में अतिरिक्त सहायता (Additional Support) की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आकलन (Assessment) किया जाता है।

आकलन (Assessment) एक सतत (Continuous) एवं उद्देश्यपूर्ण (Purposeful) प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों के ज्ञान (Knowledge), कौशल (Skills), उपलब्धियों (Achievements), अभिवृत्ति (Attitude) तथा अधिगम प्रगति (Learning Progress) का अध्ययन किया जाता है। इसके आधार पर शिक्षक (Teacher) अपनी शिक्षण विधियों (Teaching Methods) में आवश्यक सुधार करता है तथा विद्यार्थियों को उपयुक्त मार्गदर्शन (Guidance) प्रदान करता है।

आकलन का अर्थ (Meaning of Assessment)

आकलन (Assessment) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विद्यार्थियों के सीखने (Learning), सीखने की प्रक्रिया (Learning Process), उपलब्धियों (Achievements) तथा सीखने की शैली (Learning Style) के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।

यह केवल परीक्षा (Examination) में प्राप्त अंकों (Marks) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि विद्यार्थी ने कैसे सीखा, उसकी प्रगति (Progress) कैसी रही तथा उसे आगे किस प्रकार सहायता (Support) प्रदान की जानी चाहिए।

आकलन के प्रमुख उद्देश्य (Objectives of Assessment)

अधिगम की जानकारी (Learning Status)
प्रगति का मूल्यांकन (Progress Evaluation)
कठिनाइयों की पहचान (Identification of Difficulties)
शिक्षण सुधार (Teaching Improvement)
प्रतिपुष्टि (Feedback)

आकलन के प्रकार (Types of Assessment)

उद्देश्य (Purpose) एवं समय (Timing) के आधार पर आकलन (Assessment) को मुख्यतः पाँच प्रकारों में विभाजित किया जाता है।

क्रमांकआकलन का प्रकार (Type of Assessment)मुख्य उद्देश्य
1निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment)सीखने के दौरान सुधार करना।
2संकलनात्मक आकलन (Summative Assessment)अंतिम उपलब्धियों का मूल्यांकन करना।
3स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment)पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) का पता लगाना।
4निदानात्मक आकलन (Diagnostic Assessment)सीखने की कठिनाइयों की पहचान एवं समाधान करना।
5विद्यालय आधारित आकलन (School-Based Assessment)विद्यालय स्तर पर समग्र एवं निरंतर मूल्यांकन करना।

1. निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment)

निर्माणात्मक आकलन का अर्थ (Meaning of Formative Assessment)

निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) वह आकलन है जो शिक्षण (Teaching) के दौरान निरंतर किया जाता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति (Learning Progress) पर नज़र रखना तथा समय-समय पर सुधार (Improvement) करना होता है।

इसे अधिगम के लिए आकलन (Assessment for Learning) भी कहा जाता है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर सीखने (Better Learning) के अवसर प्रदान करना है।

इस प्रकार के आकलन में शिक्षक (Teacher) केवल अंक (Marks) नहीं देता, बल्कि रचनात्मक प्रतिपुष्टि (Constructive Feedback) देकर विद्यार्थियों को उनकी गलतियों (Mistakes) को सुधारने में सहायता करता है।

निर्माणात्मक आकलन की विशेषताएँ (Characteristics of Formative Assessment)

सतत प्रक्रिया (Continuous Process)
अनौपचारिक (Informal)
सुधारात्मक (Improvement-Oriented)
प्रतिपुष्टि आधारित (Feedback-Based)
विद्यार्थी-केंद्रित (Learner-Centred)

निर्माणात्मक आकलन के उद्देश्य

विद्यार्थियों की प्रगति (Progress) की निरंतर निगरानी करना।

सीखने की कठिनाइयों (Learning Difficulties) की पहचान करना।

समय पर सुधारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) प्रदान करना।

विद्यार्थियों को आत्मविश्वास (Confidence) विकसित करने में सहायता करना।

शिक्षण विधियों (Teaching Methods) को अधिक प्रभावी बनाना।

निर्माणात्मक आकलन के उदाहरण (Examples)

गतिविधिउद्देश्य
कक्षा प्रश्न (Class Questions)समझ की जाँच करना।
गृहकार्य (Homework)नियमित अभ्यास का मूल्यांकन।
परियोजना कार्य (Project Work)रचनात्मकता एवं कौशल का विकास।
समूह चर्चा (Group Discussion)संचार एवं सहयोग कौशल का मूल्यांकन।
सहपाठी मूल्यांकन (Peer Assessment)सहयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा देना।
स्व-मूल्यांकन (Self Assessment)आत्मविश्लेषण की क्षमता विकसित करना।

निर्माणात्मक आकलन के लाभ (Advantages)

सीखने में निरंतर सुधार होता है।

विद्यार्थियों का परीक्षा तनाव कम होता है।

शिक्षक को समय पर प्रतिपुष्टि (Feedback) प्राप्त होती है।

व्यक्तिगत शिक्षण (Individualized Teaching) संभव होता है।

आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता विकसित होती है।

2. संकलनात्मक आकलन (Summative Assessment)

संकलनात्मक आकलन का अर्थ (Meaning of Summative Assessment)

संकलनात्मक आकलन (Summative Assessment) वह आकलन है जो शिक्षण अवधि (Teaching Period) के अंत (End of Instruction) में किया जाता है। इसका उद्देश्य यह जानना होता है कि विद्यार्थी ने निर्धारित अवधि (Specified Period) में कितना अधिगम (Learning) प्राप्त किया है।

इसे अधिगम का आकलन (Assessment of Learning) कहा जाता है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य अंतिम उपलब्धियों (Final Achievement) का मूल्यांकन करना होता है।

संकलनात्मक आकलन की विशेषताएँ (Characteristics)

औपचारिक (Formal)
परिणाम आधारित (Result-Oriented)
ग्रेड एवं रैंक (Grade & Rank)
प्रमाणन (Certification)

संकलनात्मक आकलन के उद्देश्य

विद्यार्थियों की अंतिम उपलब्धियों का मूल्यांकन करना।

ग्रेड (Grades) एवं अंक (Marks) प्रदान करना।

उन्नयन (Promotion) संबंधी निर्णय लेना।

विभिन्न विद्यार्थियों के प्रदर्शन (Performance) की तुलना करना।

संकलनात्मक आकलन के उदाहरण

वार्षिक परीक्षा (Annual Examination)
अर्द्धवार्षिक परीक्षा (Half-Yearly Examination)
यूनिट टेस्ट (Unit Test)
सेमेस्टर परीक्षा (Semester Examination)
अंतिम परियोजना (Final Project)

निर्माणात्मक एवं संकलनात्मक आकलन में अंतर

आधारनिर्माणात्मक आकलन
(Formative Assessment)
संकलनात्मक आकलन
(Summative Assessment)
समय (Time)शिक्षण के दौरानशिक्षण के अंत में
उद्देश्य (Purpose)सुधार करनाअंतिम मूल्यांकन करना
प्रकृति (Nature)सतत एवं अनौपचारिकऔपचारिक एवं परिणाम आधारित
प्रतिपुष्टि (Feedback)नियमित रूप से दी जाती हैसामान्यतः परीक्षा के बाद दी जाती है
उदाहरण (Example)गृहकार्य, परियोजना, प्रश्नोत्तरीवार्षिक परीक्षा, सेमेस्टर परीक्षा

3. स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment)

स्थान निर्धारण आकलन का अर्थ (Meaning of Placement Assessment)

स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) वह आकलन है जो किसी नए विषय (New Topic), पाठ्यक्रम (Course) या शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) के प्रारम्भ होने से पहले किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों (Students) के पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge), पूर्व अनुभव (Previous Experience), सीखने की तैयारी (Readiness to Learn) तथा प्रवेश व्यवहार (Entry Behaviour) का पता लगाना होता है।

जब शिक्षक किसी नए अध्याय (Chapter) को पढ़ाने की योजना बनाता है, तो सबसे पहले यह जानना आवश्यक होता है कि विद्यार्थियों को उस विषय के बारे में पहले से कितनी जानकारी है। यदि शिक्षक विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) से परिचित होगा, तभी वह प्रभावी शिक्षण (Effective Teaching) की योजना बना सकेगा।

इस प्रकार स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) शिक्षण की उचित शुरुआत (Proper Beginning of Teaching) करने में सहायता करता है।

स्थान निर्धारण आकलन की विशेषताएँ (Characteristics of Placement Assessment)

शिक्षण से पूर्व (Before Teaching)
पूर्व ज्ञान पर आधारित (Previous Knowledge Based)
प्रवेश व्यवहार (Entry Behaviour)
योजना निर्माण (Planning)
व्यक्तिगत अंतर (Individual Differences)

स्थान निर्धारण आकलन के उद्देश्य

  • विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) की जानकारी प्राप्त करना।
  • प्रवेश व्यवहार (Entry Behaviour) का मूल्यांकन करना।
  • विद्यार्थियों की सीखने की तैयारी (Learning Readiness) का पता लगाना।
  • उचित शिक्षण रणनीति (Teaching Strategy) तैयार करना।
  • शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) को प्रभावी बनाना।

स्थान निर्धारण आकलन के उदाहरण (Examples)

उदाहरणउद्देश्य
पूर्व-परीक्षण (Pre-Test)पूर्व ज्ञान की जाँच करना।
मौखिक प्रश्न (Oral Questions)विद्यार्थियों की समझ का पता लगाना।
प्रारम्भिक प्रश्नोत्तरी (Initial Quiz)विषय की आधारभूत जानकारी जानना।
चर्चा (Discussion)विद्यार्थियों के अनुभव एवं विचार जानना।

4. निदानात्मक आकलन (Diagnostic Assessment)

निदानात्मक आकलन का अर्थ (Meaning of Diagnostic Assessment)

निदानात्मक आकलन (Diagnostic Assessment) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की कठिनाइयों (Learning Difficulties) तथा त्रुटियों (Errors) की पहचान की जाती है। इसका उद्देश्य केवल समस्या (Problem) बताना नहीं, बल्कि उसके कारण (Cause) का पता लगाकर उचित उपचार (Remedial Measures) उपलब्ध कराना भी होता है।

यदि निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) के दौरान यह ज्ञात होता है कि कुछ विद्यार्थी किसी विशेष अवधारणा (Concept) को सही प्रकार से नहीं समझ पाए हैं, तो शिक्षक निदानात्मक आकलन (Diagnostic Assessment) करता है और उसके बाद उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) प्रदान करता है।

निदानात्मक आकलन की विशेषताएँ (Characteristics)

समस्या की पहचान (Problem Identification)
कारण विश्लेषण (Cause Analysis)
सुधारात्मक (Remedial)
निर्माणात्मक आकलन से संबंधित (Linked with Formative Assessment)

निदानात्मक आकलन के उद्देश्य

  • सीखने की कठिनाइयों (Learning Difficulties) की पहचान करना।
  • त्रुटियों (Errors) के कारणों का विश्लेषण करना।
  • उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की योजना बनाना।
  • विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता (Learning Quality) में सुधार करना।

निदानात्मक आकलन की प्रक्रिया

चरण (Step)
कठिनाई की पहचान (Identification)
कारण विश्लेषण (Analysis)
उपचार (Remediation)
पुनः मूल्यांकन (Reassessment)

निदानात्मक आकलन के लाभ (Advantages)

  • प्रत्येक विद्यार्थी की समस्या का समाधान किया जा सकता है।
  • उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) प्रभावी बनता है।
  • कमजोर विद्यार्थियों (Slow Learners) को विशेष सहायता मिलती है।
  • सीखने की गुणवत्ता (Quality of Learning) बढ़ती है।

5. विद्यालय आधारित आकलन (School-Based Assessment – SBA)

विद्यालय आधारित आकलन का अर्थ (Meaning of School-Based Assessment)

विद्यालय आधारित आकलन (School-Based Assessment – SBA) एक ऐसी मूल्यांकन प्रणाली (Assessment System) है जिसमें विद्यार्थियों का मूल्यांकन विद्यालय (School) स्तर पर निरंतर एवं समग्र रूप से किया जाता है।

इस प्रणाली में केवल लिखित परीक्षा (Written Examination) पर निर्भर नहीं रहा जाता, बल्कि शिक्षक (Teacher), विद्यार्थी (Student) तथा सहपाठी (Peer) सभी मूल्यांकन प्रक्रिया (Assessment Process) में भाग लेते हैं।

विद्यालय आधारित आकलन (SBA) का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के ज्ञान (Knowledge), कौशल (Skills), अभिवृत्ति (Attitude), जीवन कौशल (Life Skills) तथा सामाजिक गुणों (Social Qualities) का समग्र विकास (Holistic Development) सुनिश्चित करना है।

विद्यालय आधारित आकलन की प्रमुख विशेषताएँ (Salient Features of SBA)

शिक्षण एवं आकलन का एकीकरण (Integration of Teaching and Assessment)
विद्यार्थी-केंद्रित (Child-Centred)
गतिविधि आधारित (Activity-Based)
दक्षता आधारित (Competency-Based)
तनावमुक्त (Stress-Free)
स्व-मूल्यांकन एवं सहपाठी मूल्यांकन (Self & Peer Assessment)

विद्यालय आधारित आकलन के उद्देश्य (Objectives)

  • शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना।
  • विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) को बढ़ावा देना।
  • सीखने को तनावमुक्त (Stress-Free Learning) बनाना।
  • आत्मविश्वास (Self Confidence) का विकास करना।
  • सीखने के परिणामों (Learning Outcomes) पर ध्यान केंद्रित करना।

विद्यालय आधारित आकलन के लाभ (Advantages)

निरंतर मूल्यांकन (Continuous Assessment)
व्यक्तिगत विकास (Individual Development)
परीक्षा तनाव में कमी (Reduced Exam Stress)
गुणवत्तापूर्ण अधिगम (Quality Learning)

विभिन्न आकलनों की तुलना (Comparison of Types of Assessment)

प्रकार (Type)कब किया जाता है?मुख्य उद्देश्य (Purpose)प्रमुख शब्द (Keyword)
निर्माणात्मक (Formative)शिक्षण के दौरानसुधार करनाAssessment for Learning
संकलनात्मक (Summative)शिक्षण के अंत मेंअंतिम मूल्यांकनAssessment of Learning
स्थान निर्धारण (Placement)शिक्षण से पहलेपूर्व ज्ञान जाननाEntry Behaviour
निदानात्मक (Diagnostic)कठिनाई आने परसमस्या पहचान एवं समाधानLearning Difficulties
विद्यालय आधारित (School-Based)पूरे वर्षसमग्र विकासContinuous Assessment

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

Placement Assessment का मुख्य उद्देश्य प्रवेश व्यवहार (Entry Behaviour) जानना है।

Diagnostic Assessment का उद्देश्य सीखने की कठिनाइयों (Learning Difficulties) की पहचान एवं उपचार करना है।

School-Based Assessment (SBA) में Teacher Assessment, Peer Assessment तथा Self Assessment तीनों को महत्व दिया जाता है।

SBA रटने (Memorization) के स्थान पर दक्षता (Competency) आधारित अधिगम को प्रोत्साहित करता है।

विद्यालय आधारित आकलन (SBA) तनावमुक्त (Stress-Free) एवं विद्यार्थी-केंद्रित (Child-Centred) शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है।

निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) = Assessment for Learning

संकलनात्मक आकलन (Summative Assessment) = Assessment of Learning

निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) अनौपचारिक (Informal) होता है।

संकलनात्मक आकलन (Summative Assessment) औपचारिक (Formal) होता है।

निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) का उद्देश्य सुधार (Improvement) है।

संकलनात्मक आकलन (Summative Assessment) का उद्देश्य अंतिम उपलब्धि (Final Achievement) का मूल्यांकन करना है।

Placement Assessment का Keyword = Entry Behaviour (प्रवेश व्यवहार)

Diagnostic Assessment का Keyword = Learning Difficulties (सीखने की कठिनाइयाँ)

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Published by
Ravi Kumar, Founder of JAC Portal (Jharkhand), shares latest JAC Board updates, study materials (Class 8–12), and JTET notes to help students with accurate and useful information.

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