प्रत्येक विद्यार्थी (Student) किसी भी नए विषय (New Topic) को सीखने से पहले कुछ न कुछ पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) एवं अनुभव (Previous Experience) रखता है। यदि शिक्षक (Teacher) बिना विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान को जाने सीधे नए पाठ (Lesson) का शिक्षण प्रारम्भ कर देता है, तो कई विद्यार्थियों को विषय समझने में कठिनाई (Learning Difficulty) हो सकती है। इसलिए प्रभावी शिक्षण (Effective Teaching) के लिए यह आवश्यक है कि पहले विद्यार्थियों के प्रारम्भिक ज्ञान (Initial Knowledge) एवं सीखने की तैयारी (Readiness to Learn) का मूल्यांकन किया जाए।
इसी उद्देश्य से स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) किया जाता है। यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) प्रारम्भ होने से पहले आयोजित किया जाने वाला आकलन (Assessment) है, जिसके माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge), प्रवेश व्यवहार (Entry Behaviour) तथा सीखने की क्षमता (Learning Readiness) का पता लगाता है। इसके आधार पर शिक्षक उचित शिक्षण योजना (Teaching Plan) तैयार करता है, जिससे अधिगम (Learning) अधिक प्रभावी एवं उद्देश्यपूर्ण बनता है।
अर्थ
स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) वह मूल्यांकन प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से शिक्षण (Teaching) प्रारम्भ होने से पहले विद्यार्थियों की पूर्व तैयारी (Prior Readiness), पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) तथा प्रवेश व्यवहार (Entry Behaviour) का अध्ययन किया जाता है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि विद्यार्थी नए विषय (New Topic) को सीखने के लिए कितने तैयार हैं तथा उन्हें किस स्तर (Level) से शिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।
परिभाषा
स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) एक प्रारम्भिक (Initial) एवं पूर्व-शिक्षण (Pre-Instructional) मूल्यांकन प्रक्रिया है, जिसका उपयोग विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge), अनुभव (Experience) तथा अधिगम की तैयारी (Learning Readiness) का पता लगाने के लिए किया जाता है।
स्थान निर्धारण आकलन के उद्देश्य
विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) की जानकारी प्राप्त करना।
प्रवेश व्यवहार (Entry Behaviour) का मूल्यांकन करना।
विद्यार्थियों की सीखने की तैयारी (Learning Readiness) का पता लगाना।
शिक्षण की उचित योजना (Teaching Planning) बनाना।
विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं (Individual Differences) को समझना।
कठिन एवं सरल विषयों (Easy and Difficult Topics) का उचित क्रम निर्धारित करना।
शिक्षण (Teaching) को विद्यार्थियों की आवश्यकताओं (Needs) के अनुसार बनाना।
स्थान निर्धारण आकलन की विशेषताएँ
| शिक्षण से पूर्व (Pre-Instructional) |
| पूर्व ज्ञान आधारित (Based on Previous Knowledge) |
| प्रवेश व्यवहार (Entry Behaviour) |
| योजना निर्माण (Planning-Oriented) |
| निदानात्मक आधार (Foundation for Diagnosis) |
| विद्यार्थी-केंद्रित (Learner-Centred) |
स्थान निर्धारण आकलन की प्रक्रिया (Process of Placement Assessment)
| पूर्व जानकारी एकत्र करना (Collect Previous Information) |
| प्रारम्भिक परीक्षण (Pre-Test) |
| परिणामों का विश्लेषण (Analysis of Results) |
| समूह निर्धारण (Grouping of Students) |
| शिक्षण योजना (Teaching Planning) |
स्थान निर्धारण आकलन के उपकरण (Tools of Placement Assessment)
| उपकरण (Tool) | उपयोग |
|---|---|
| पूर्व-परीक्षण (Pre-Test) | पूर्व ज्ञान की जाँच करना। |
| मौखिक प्रश्न (Oral Questions) | विद्यार्थियों की समझ का मूल्यांकन। |
| प्रश्नावली (Questionnaire) | विषय से संबंधित जानकारी प्राप्त करना। |
| साक्षात्कार (Interview) | विद्यार्थियों की रुचि एवं अनुभव जानना। |
| समूह चर्चा (Group Discussion) | विषय की प्रारम्भिक समझ का मूल्यांकन। |
| अवलोकन (Observation) | व्यवहार एवं सहभागिता का अध्ययन। |
स्थान निर्धारण आकलन के लाभ (Advantages)
स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) के अनेक लाभ हैं—
- शिक्षक विद्यार्थियों की वास्तविक तैयारी (Actual Readiness) को समझ पाता है।
- पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) के आधार पर प्रभावी शिक्षण (Effective Teaching) संभव होता है।
- सीखने की कठिनाइयों (Learning Difficulties) को प्रारम्भ में ही पहचाना जा सकता है।
- शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) अधिक व्यवस्थित बनती है।
- विद्यार्थियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं (Individual Needs) के अनुसार शिक्षण संभव होता है।
- समय (Time) एवं संसाधनों (Resources) का उचित उपयोग होता है।
स्थान निर्धारण आकलन की सीमाएँ (Limitations)
| पूर्व ज्ञान पर निर्भरता (Depends on Previous Knowledge) |
| समय की आवश्यकता (Time Consuming) |
| पूर्ण जानकारी नहीं मिलती (Incomplete Information) |
| शिक्षक के कौशल पर निर्भर (Depends on Teacher’s Skill) |
स्थान निर्धारण आकलन के उदाहरण (Examples)
नए अध्याय (Chapter) को पढ़ाने से पहले पूर्व-परीक्षण (Pre-Test) लेना।
कक्षा में प्रारम्भिक मौखिक प्रश्न (Oral Questions) पूछना।
विज्ञान (Science) के नए पाठ से पहले पुराने सिद्धांतों (Previous Concepts) की जाँच करना।
गणित (Mathematics) में नई इकाई (Unit) शुरू करने से पहले आधारभूत अवधारणाओं (Basic Concepts) की समीक्षा करना।
भाषा (Language) शिक्षण से पहले शब्दावली (Vocabulary) एवं व्याकरण (Grammar) की जानकारी लेना।
शिक्षक की भूमिका (Role of Teacher)
स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) में शिक्षक (Teacher) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक—
- विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) का मूल्यांकन करता है।
- प्रवेश व्यवहार (Entry Behaviour) की पहचान करता है।
- सीखने की तैयारी (Learning Readiness) का विश्लेषण करता है।
- उपयुक्त शिक्षण रणनीति (Teaching Strategy) तैयार करता है।
- विद्यार्थियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं (Individual Needs) के अनुसार शिक्षण प्रदान करता है।
- कमजोर विद्यार्थियों (Slow Learners) के लिए अतिरिक्त सहायता (Additional Support) की व्यवस्था करता है।
स्थान निर्धारण आकलन के प्रमुख उपयोग (Educational Uses)
| उपयोग (Use) | उद्देश्य |
|---|---|
| नए पाठ की शुरुआत | विद्यार्थियों की तैयारी जानना |
| विषय चयन | उचित स्तर निर्धारित करना |
| समूह निर्माण | समान क्षमता वाले विद्यार्थियों का समूह बनाना |
| उपचारात्मक शिक्षण | प्रारम्भिक कमियों की पहचान करना |
| पाठ योजना | प्रभावी शिक्षण रणनीति तैयार करना |
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य (Exam-Oriented Points)
| मुख्य उद्देश्य | पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) की जाँच |
| दूसरा नाम | Entry Assessment (प्रवेश आकलन) |
| कब किया जाता है? | शिक्षण प्रारम्भ होने से पहले |
| प्रमुख शब्द (Keyword) | Entry Behaviour (प्रवेश व्यवहार) |
| प्रकृति | प्रारम्भिक (Initial) एवं पूर्व-शिक्षण (Pre-Instructional) |
Previous Year MCQs
प्रश्न 1. स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(A) अंतिम परिणाम घोषित करना
(B) पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) का पता लगाना
(C) ग्रेड देना
(D) प्रमाणपत्र प्रदान करना
उत्तर: (B) पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge) का पता लगाना
प्रश्न 2. स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) का प्रमुख Keyword क्या है?
(A) Feedback
(B) Learning Outcome
(C) Entry Behaviour
(D) Remedial Teaching
उत्तर: (C) Entry Behaviour
अभ्यास प्रश्न
स्थान निर्धारण आकलन (Placement Assessment) की परिभाषा लिखिए।
स्थान निर्धारण आकलन के उद्देश्य एवं विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
प्रभावी शिक्षण में स्थान निर्धारण आकलन का महत्व स्पष्ट कीजिए।
स्थान निर्धारण आकलन एवं निदानात्मक आकलन में अंतर लिखिए।
स्थान निर्धारण आकलन में शिक्षक की भूमिका का वर्णन कीजिए।
Quick Revision Table
| बिंदु | उत्तर |
|---|---|
| दूसरा नाम | Entry Assessment |
| मुख्य उद्देश्य | पूर्व ज्ञान की जाँच |
| प्रमुख शब्द | Entry Behaviour |
| समय | शिक्षण प्रारम्भ होने से पहले |
| प्रकृति | Pre-Instructional Assessment |
Memory Trick
PLACE = Previous Learning Assessment Comes Earlier
P → Previous Knowledge (पूर्व ज्ञान)
L → Learning Readiness (सीखने की तैयारी)
A → Assessment Before Teaching (शिक्षण से पहले आकलन)
C → Check Entry Behaviour (प्रवेश व्यवहार की जाँच)
E → Effective Teaching (प्रभावी शिक्षण)
याद रखें:
Placement Assessment = Before Teaching + Previous Knowledge + Entry Behaviour। यही इसकी सबसे महत्वपूर्ण पहचान है।




















