निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) आधुनिक शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह ऐसी मूल्यांकन प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों (Students) को अंक (Marks) देना नहीं, बल्कि उनकी सीखने की प्रगति (Learning Progress) का निरंतर अध्ययन करना तथा आवश्यकतानुसार सुधार (Improvement) करना होता है।
यह आकलन (Assessment) शिक्षण (Teaching) के दौरान नियमित रूप से किया जाता है, जिससे शिक्षक (Teacher) यह समझ पाता है कि विद्यार्थी किसी विषय (Subject) या अवधारणा (Concept) को किस सीमा तक समझ पाए हैं। यदि किसी विद्यार्थी को सीखने में कठिनाई (Learning Difficulty) आती है, तो शिक्षक तुरंत सुधारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) प्रदान करता है। इसी कारण निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) को अधिगम के लिए आकलन (Assessment for Learning) भी कहा जाता है। यह विद्यार्थियों को बेहतर सीखने (Better Learning), आत्मविश्वास (Self-Confidence) विकसित करने तथा निरंतर प्रगति (Continuous Progress) करने के लिए प्रेरित करता है।
अर्थ
निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) वह सतत (Continuous) एवं सुधारात्मक (Improvement-Oriented) मूल्यांकन प्रक्रिया है, जो शिक्षण-अधिगम (Teaching-Learning) के दौरान विद्यार्थियों की प्रगति (Progress), समझ (Understanding), कौशल (Skills) तथा प्रदर्शन (Performance) का मूल्यांकन करने के लिए अपनाई जाती है।
इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अंक देना नहीं, बल्कि उनकी सीखने की कमियों (Learning Gaps) की पहचान करके उन्हें समय पर उचित मार्गदर्शन (Guidance) एवं प्रतिपुष्टि (Feedback) प्रदान करना है।
परिभाषा
निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत शिक्षक (Teacher) शिक्षण के दौरान विद्यार्थियों के अधिगम (Learning) का निरंतर मूल्यांकन करता है, उनकी कठिनाइयों (Learning Difficulties) की पहचान करता है तथा सुधारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) द्वारा सीखने की गुणवत्ता (Quality of Learning) को बढ़ाता है।
प्रमुख उद्देश्य
निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
- विद्यार्थियों की अधिगम प्रगति (Learning Progress) का निरंतर मूल्यांकन करना।
- सीखने में आने वाली कठिनाइयों (Learning Difficulties) की समय रहते पहचान करना।
- सुधारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की व्यवस्था करना।
- विद्यार्थियों को नियमित प्रतिपुष्टि (Constructive Feedback) प्रदान करना।
- शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) को अधिक प्रभावी बनाना।
- विद्यार्थियों में आत्मविश्वास (Self-Confidence) एवं आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) का विकास करना।
- रटने (Rote Learning) के स्थान पर समझ-आधारित अधिगम (Conceptual Learning) को बढ़ावा देना।
- प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं (Individual Needs) को समझना।
निर्माणात्मक आकलन की विशेषताएँ (Characteristics of Formative Assessment)
| सतत (Continuous) |
| अनौपचारिक (Informal) |
| सुधारात्मक (Remedial) |
| प्रतिपुष्टि आधारित (Feedback-Oriented) |
| विद्यार्थी-केंद्रित (Learner-Centred) |
| प्रक्रिया आधारित (Process-Oriented) |
निर्माणात्मक आकलन की प्रक्रिया (Process of Formative Assessment)
निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं—
| अधिगम उद्देश्य निर्धारित करना (Setting Learning Objectives) |
| गतिविधियों का आयोजन (Conducting Learning Activities) |
| निरंतर अवलोकन (Continuous Observation) |
| प्रतिपुष्टि प्रदान करना (Providing Feedback) |
| सुधारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) |
| पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) |
निर्माणात्मक आकलन के उपकरण (Tools of Formative Assessment)
निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) में अनेक प्रकार के उपकरण (Assessment Tools) उपयोग किए जाते हैं।
| उपकरण | उपयोग |
|---|---|
| कक्षा प्रश्न (Classroom Questions) | विद्यार्थियों की समझ का मूल्यांकन करना। |
| गृहकार्य (Homework) | नियमित अभ्यास का आकलन करना। |
| परियोजना कार्य (Project Work) | रचनात्मकता एवं समस्या समाधान क्षमता का विकास। |
| प्रश्नोत्तरी (Quiz) | त्वरित मूल्यांकन करना। |
| अवलोकन (Observation) | व्यवहार एवं सहभागिता का अध्ययन करना। |
| पोर्टफोलियो (Portfolio) | विद्यार्थी की प्रगति का संग्रह रखना। |
| सहपाठी मूल्यांकन (Peer Assessment) | सहयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा देना। |
| स्व-मूल्यांकन (Self Assessment) | आत्मविश्लेषण की क्षमता विकसित करना। |
निर्माणात्मक आकलन के लाभ (Advantages)
निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) के अनेक लाभ हैं—
- विद्यार्थियों की अधिगम प्रगति (Learning Progress) पर निरंतर नज़र रखी जा सकती है।
- सीखने की कठिनाइयों (Learning Difficulties) का समय रहते समाधान किया जा सकता है।
- विद्यार्थियों में आत्मविश्वास (Confidence) बढ़ता है।
- शिक्षण (Teaching) अधिक प्रभावी एवं विद्यार्थी-केंद्रित (Learner-Centred) बनता है।
- परीक्षा का तनाव (Exam Stress) कम होता है।
- शिक्षक प्रत्येक विद्यार्थी के अनुसार व्यक्तिगत मार्गदर्शन (Individual Guidance) दे सकता है।
- रचनात्मक सोच (Creative Thinking) एवं समस्या समाधान (Problem Solving) को बढ़ावा मिलता है।
निर्माणात्मक आकलन की सीमाएँ (Limitations)
| समय अधिक लगता है (Time Consuming) |
| शिक्षक पर अतिरिक्त कार्यभार (Extra Workload) |
| प्रशिक्षण की आवश्यकता (Need of Training) |
| बड़ी कक्षाओं में कठिन (Difficult in Large Classes) |
निर्माणात्मक आकलन के उदाहरण (Examples)
कक्षा में मौखिक प्रश्न (Oral Questions) पूछना।
गृहकार्य (Homework) की जाँच करना।
परियोजना कार्य (Project Work) का मूल्यांकन करना।
समूह चर्चा (Group Discussion) आयोजित करना।
प्रश्नोत्तरी (Quiz) लेना।
प्रस्तुतीकरण (Presentation) का मूल्यांकन करना।
गतिविधि आधारित अधिगम (Activity-Based Learning) का अवलोकन करना।
शिक्षक की भूमिका (Role of Teacher)
निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) में शिक्षक (Teacher) केवल मूल्यांकनकर्ता (Evaluator) नहीं होता, बल्कि वह मार्गदर्शक (Guide), प्रेरक (Motivator) तथा सहायक (Facilitator) की भूमिका भी निभाता है।
शिक्षक—
- विद्यार्थियों की प्रगति का नियमित अवलोकन करता है।
- रचनात्मक प्रतिपुष्टि (Constructive Feedback) प्रदान करता है।
- सीखने की कठिनाइयों की पहचान करता है।
- उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की व्यवस्था करता है।
- विद्यार्थियों को स्व-मूल्यांकन (Self Assessment) के लिए प्रेरित करता है।
- सीखने का सकारात्मक वातावरण (Positive Learning Environment) तैयार करता है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य (Exam-Oriented Points)
| दूसरा नाम | Assessment for Learning (अधिगम के लिए आकलन) |
| प्रकृति | सतत (Continuous) एवं अनौपचारिक (Informal) |
| मुख्य उद्देश्य | सीखने में सुधार (Improvement in Learning) |
| कब किया जाता है? | शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) के दौरान |
| मुख्य आधार | प्रतिपुष्टि (Feedback) एवं सुधारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) |
| सबसे महत्वपूर्ण शब्द | Feedback, Continuous, Improvement, Remedial Teaching |
Previous Year MCQs
प्रश्न 1. निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) को किस नाम से जाना जाता है?
(A) Assessment of Learning
(B) Assessment for Learning
(C) Assessment as Learning
(D) Diagnostic Assessment
उत्तर: (B) Assessment for Learning
प्रश्न 2. निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(A) केवल अंक देना
(B) विद्यार्थियों की रैंक निर्धारित करना
(C) सीखने में सुधार करना
(D) प्रमाणपत्र प्रदान करना
उत्तर: (C) सीखने में सुधार करना
अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) की परिभाषा लिखिए।
निर्माणात्मक आकलन की पाँच प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
निर्माणात्मक आकलन एवं संकलनात्मक आकलन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
निर्माणात्मक आकलन में शिक्षक की भूमिका का वर्णन कीजिए।
निर्माणात्मक आकलन के लाभ एवं सीमाएँ लिखिए।
Quick Revision Table
| बिंदु | उत्तर |
|---|---|
| दूसरा नाम | Assessment for Learning |
| प्रकृति | सतत एवं अनौपचारिक |
| उद्देश्य | सुधार करना |
| मुख्य आधार | प्रतिपुष्टि (Feedback) |
| प्रमुख लाभ | सीखने की गुणवत्ता में सुधार |
Memory Trick (स्मरण सूत्र)
F → Feedback (प्रतिपुष्टि)
O → Ongoing (निरंतर)
R → Remedial (सुधारात्मक शिक्षण)
M → Monitoring (प्रगति की निगरानी)
FORM = Formative Assessment ✔️
याद रखें:
“Formative = Feedback + Improvement + During Teaching” अर्थात निर्माणात्मक आकलन (Formative Assessment) हमेशा शिक्षण के दौरान (During Teaching) किया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य सीखने में सुधार (Improvement in Learning) होता है।




















