जंतुओं में जनन (Class 8 Science Notes in Hindi)

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कक्षा 8 विज्ञान का अध्याय “जंतुओं में जनन” जीवविज्ञान का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें हम यह समझते हैं कि जीव अपने जैसे नए जीवों का निर्माण कैसे करते हैं। जनन एक ऐसी जैविक प्रक्रिया है जो प्रजातियों के अस्तित्व और निरंतरता के लिए आवश्यक है। इस अध्याय में हम लैंगिक और अलैंगिक जनन, नर एवं मादा जनन तंत्र, निषेचन, भ्रूण विकास, जीवन चक्र, तथा आधुनिक तकनीकों जैसे IVF और क्लोनिंग के बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं। यह अध्याय छात्रों को जीवों के जीवन चक्र और विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जंतुओं में जनन (Class 8 Science Notes in Hindi)
पाठ्यपुस्तकNCERT
कक्षा8वीं
विषयविज्ञान
अध्याय का नामजंतुओं में जनन
माध्यमहिंदी
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Class 8th NotesAll Subjects
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JAC Portal Websitewww.jacportal.com
विवरणजानकारी
पाठ्यपुस्तकNCERT
कक्षा8वीं
विषयविज्ञान
अध्यायअध्याय 6
अध्याय का नामजंतुओं में जनन
माध्यमहिंदी

जनन क्या है (What is Reproduction)

जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने जैसे नए जीवों को उत्पन्न करते हैं। यह प्रक्रिया जीवों की प्रजाति को बनाए रखने और पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जनन का महत्व

प्रजाति का संरक्षण
जीवों की संख्या में वृद्धि
विविधता का निर्माण

जंतुओं में जनन के प्रकार

जंतुओं में मुख्यतः दो प्रकार के जनन पाए जाते हैं:

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)

इस प्रकार के जनन में नर और मादा युग्मक (शुक्राणु और अंडाणु) का संलयन होता है, जिससे एक नए जीव का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया जटिल होती है और इसमें दोनों अभिभावकों की भागीदारी होती है।

अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)

इस प्रकार के जनन में केवल एक ही जनक से नए जीव का निर्माण होता है। इसमें युग्मकों का संलयन नहीं होता।

नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)

नर जनन तंत्र में मुख्यतः वृषण, शुक्राणु नलिकाएँ और शिश्न शामिल होते हैं। वृषण शुक्राणु का निर्माण करते हैं।

शुक्राणु की संरचना

सिर – आनुवंशिक सामग्री
मध्य भाग – ऊर्जा प्रदान करता है
पूँछ – गति में सहायता

मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)

मादा जनन तंत्र में अंडाशय, अंडवाहिनी और गर्भाशय होते हैं। अंडाशय अंडाणु का निर्माण करते हैं।

निषेचन (Fertilization)

जब शुक्राणु और अंडाणु का संलयन होता है, तो उसे निषेचन कहते हैं। इसके परिणामस्वरूप युग्मनज (Zygote) बनता है।

निषेचन के प्रकार

प्रकारविवरणउदाहरण
आंतरिक निषेचनशरीर के अंदर होता हैमनुष्य, गाय
बाह्य निषेचनशरीर के बाहर होता हैमछली, मेंढक

IVF (इन विट्रो निषेचन)

यह एक आधुनिक तकनीक है जिसमें निषेचन शरीर के बाहर प्रयोगशाला में कराया जाता है। इसके बाद विकसित भ्रूण को गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।

महत्व

बांझपन की समस्या का समाधान
आधुनिक चिकित्सा में उपयोग

परखनली शिशु (Test Tube Baby)

IVF तकनीक से जन्मे शिशु को परखनली शिशु कहा जाता है। यह नाम केवल प्रक्रिया को दर्शाता है, क्योंकि विकास गर्भाशय में ही होता है।

भ्रूण विकास (Embryo Development)

निषेचन के बाद युग्मनज लगातार विभाजित होकर भ्रूण बनता है। यह भ्रूण धीरे-धीरे विकसित होकर अंगों का निर्माण करता है।

गर्भ (Foetus)

जब भ्रूण में सभी अंग विकसित हो जाते हैं, तो उसे गर्भ कहा जाता है।

जंतुओं के प्रकार (Based on Birth)

जरायुज जंतु (Viviparous)

जो सीधे शिशु को जन्म देते हैं
उदाहरण: मनुष्य, गाय

अंडप्रजक जंतु (Oviparous)

जो अंडे देते हैं
उदाहरण: मुर्गी, मेंढक

मेंढक का जीवन चक्र (Life Cycle of Frog)

चरणविवरण
अंडापानी में दिया जाता है
टैडपोलमछली जैसा लार्वा
कायांतरणशरीर में परिवर्तन
वयस्कपूर्ण विकसित मेंढक

कायांतरण (Metamorphosis)

लार्वा से वयस्क बनने की प्रक्रिया जिसमें शरीर में बड़े परिवर्तन होते हैं, उसे कायांतरण कहते हैं।

अलैंगिक जनन की विधियाँ

मुकुलन (Budding)

हाइड्रा में छोटे उभार से नया जीव बनता है।

द्विखंडन (Binary Fission)

अमीबा दो भागों में विभाजित होकर नए जीव बनाता है।

अन्य विधियाँ

खंडन
कायिक जनन

क्लोनिंग (Cloning)

किसी जीव की समान प्रतिकृति बनाने की प्रक्रिया को क्लोनिंग कहते हैं।

महत्व

वैज्ञानिक अनुसंधान
चिकित्सा क्षेत्र

लैंगिक और अलैंगिक जनन में अंतर

आधारलैंगिक जननअलैंगिक जनन
जनकदोएक
विविधताअधिककम
प्रक्रियाजटिलसरल

दैनिक जीवन में महत्व

जनन से जैव विविधता बनी रहती है
कृषि और पशुपालन में उपयोग
चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास

महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points)

जनन जीवों की निरंतरता के लिए आवश्यक है
लैंगिक जनन में दो जनक होते हैं
अलैंगिक जनन में एक जनक होता है
IVF आधुनिक तकनीक है
कायांतरण जीवन चक्र का महत्वपूर्ण भाग है
क्लोनिंग वैज्ञानिक प्रक्रिया है

निष्कर्ष (Conclusion)

“जंतुओं में जनन” अध्याय जीवविज्ञान की एक महत्वपूर्ण इकाई है, जो हमें जीवन की निरंतरता और विकास की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है। यह अध्याय छात्रों को न केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायता करता है, बल्कि उन्हें जीवों के जीवन चक्र और जैविक प्रक्रियाओं की गहरी समझ भी प्रदान करता है। यदि इस अध्याय को अच्छी तरह समझ लिया जाए, तो जीवविज्ञान के आगे के विषयों को समझना आसान हो जाता है।

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Published by
Ravi Kumar, Founder of JAC Portal (Jharkhand), shares latest JAC Board updates, study materials (Class 8–12), and JTET notes to help students with accurate and useful information.

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