कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय “जैव प्रक्रम” जीव विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है, जो जीवों के जीवन को बनाए रखने वाली मूलभूत क्रियाओं को समझाता है। इस अध्याय में हम यह अध्ययन करते हैं कि जीव किस प्रकार भोजन प्राप्त करते हैं, ऊर्जा का उपयोग करते हैं, पदार्थों का परिवहन करते हैं तथा अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन करते हैं। ये सभी क्रियाएँ मिलकर जीवन को संभव बनाती हैं। पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन जैसे जैव प्रक्रम न केवल जीवों के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं, बल्कि उनके विकास और अनुकूलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

| पाठ्यपुस्तक | NCERT |
| कक्षा | 10वीं |
| विषय | विज्ञान |
| अध्याय का नाम | जैव प्रक्रम |
| माध्यम | हिंदी |
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जैव प्रक्रम क्या हैं
जैव प्रक्रम वे सभी प्रक्रियाएँ हैं जो जीवित प्राणियों के शरीर के अनुरक्षण और संचालन के लिए आवश्यक होती हैं। ये प्रक्रियाएँ निरंतर चलती रहती हैं, चाहे जीव सक्रिय अवस्था में हो या विश्राम की अवस्था में। इनका मुख्य उद्देश्य शरीर की संरचना को बनाए रखना, ऊर्जा प्राप्त करना तथा क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करना होता है।
पोषण (Nutrition)
पोषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने शरीर के लिए आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व प्राप्त करते हैं। यह ऊर्जा विभिन्न जैव क्रियाओं को संचालित करने के लिए आवश्यक होती है।
पोषण के प्रकार
1. स्वपोषी पोषण
स्वपोषी जीव जैसे हरे पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। वे सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से भोजन का निर्माण करते हैं।
प्रकाश संश्लेषण
प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके ग्लूकोज का निर्माण करते हैं।
रासायनिक समीकरण:
6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O
इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड और जल मिलकर ग्लूकोज बनाते हैं तथा ऑक्सीजन गैस का उत्सर्जन होता है। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रकाश संश्लेषण के आवश्यक घटक
क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करता है
जल जड़ों द्वारा प्राप्त होता है
कार्बन डाइऑक्साइड वायु से रंध्रों द्वारा प्रवेश करती है
सूर्य का प्रकाश ऊर्जा प्रदान करता है
2. विषमपोषी पोषण
विषमपोषी जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। जैसे मनुष्य, जानवर और कवक।
विषमपोषण के प्रकार
प्राणीसमपोषण, मृतजीवी पोषण और परजीवी पोषण इसके प्रमुख प्रकार हैं।
मानव में पाचन प्रक्रिया (Digestion in Humans)
मानव पाचन तंत्र एक जटिल प्रणाली है जिसमें कई अंग मिलकर भोजन को पचाते हैं।
पाचन के चरण
मुँह में भोजन का चबाना और लार के साथ मिलना पाचन की शुरुआत करता है। लार में उपस्थित एंजाइम स्टार्च को सरल शर्करा में बदलता है। भोजन ग्रासनली के माध्यम से आमाशय में पहुँचता है, जहाँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और एंजाइम भोजन को पचाते हैं।
क्षुद्रांत्र में पित्त रस और अग्न्याशय रस भोजन के पूर्ण पाचन में सहायता करते हैं। यहाँ दीर्घरोम (Villi) द्वारा पोषक तत्वों का अवशोषण होता है।
श्वसन (Respiration)
श्वसन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव भोजन से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। यह कोशिकाओं में होने वाली रासायनिक प्रक्रिया है।
वायवीय श्वसन
इसमें ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज का पूर्ण विघटन होता है।
समीकरण:
C₆H₁₂O₆ + O₂ → CO₂ + H₂O + ऊर्जा
यह प्रक्रिया अधिक ऊर्जा उत्पन्न करती है।
अवायवीय श्वसन
इसमें ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ग्लूकोज का आंशिक विघटन होता है।
उदाहरण के लिए यीस्ट में:
C₆H₁₂O₆ → C₂H₅OH + CO₂ + ऊर्जा
इसमें कम ऊर्जा उत्पन्न होती है।
मानव श्वसन तंत्र
मानव श्वसन तंत्र में नाक, श्वासनली, फेफड़े और कूपिकाएँ शामिल होती हैं। कूपिकाओं में गैसों का आदान-प्रदान होता है, जहाँ ऑक्सीजन रक्त में प्रवेश करती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है।
परिवहन (Transportation)
परिवहन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर के विभिन्न भागों तक पोषक तत्व, ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक पदार्थ पहुँचाए जाते हैं।
मानव में परिवहन
मानव में परिवहन हृदय, रक्त और रक्त वाहिकाओं द्वारा होता है। हृदय एक पंप की तरह कार्य करता है जो रक्त को पूरे शरीर में प्रवाहित करता है।
दोहरा परिसंचरण
मानव में रक्त एक चक्र में दो बार हृदय से होकर गुजरता है—फुफ्फुसीय और शारीरिक परिसंचरण।
रक्त और रक्त वाहिकाएँ
धमनियाँ रक्त को हृदय से बाहर ले जाती हैं
शिराएँ रक्त को हृदय की ओर लाती हैं
केशिकाएँ पदार्थों के आदान-प्रदान का कार्य करती हैं
पादपों में परिवहन
पौधों में जाइलम और फ्लोएम ऊतक परिवहन का कार्य करते हैं। जाइलम जल और खनिजों को ऊपर की ओर ले जाता है, जबकि फ्लोएम भोजन को पूरे पौधे में वितरित करता है।
उत्सर्जन (Excretion)
उत्सर्जन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकाले जाते हैं।
मानव में उत्सर्जन तंत्र
वृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग मिलकर उत्सर्जन तंत्र बनाते हैं। वृक्क रक्त को छानकर अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के रूप में बाहर निकालते हैं।
नेफ्रॉन का कार्य
नेफ्रॉन वृक्क की कार्यात्मक इकाई है, जो रक्त को शुद्ध करने का कार्य करता है।
पादपों में उत्सर्जन
पौधों में कोई विशेष उत्सर्जन अंग नहीं होता। वे अपशिष्ट पदार्थों को पत्तियों, रंध्रों या गोंद के रूप में बाहर निकालते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points)
जैव प्रक्रम जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं
पोषण ऊर्जा का मुख्य स्रोत है
श्वसन ऊर्जा उत्पन्न करता है
परिवहन शरीर में पदार्थों का वितरण करता है
उत्सर्जन अपशिष्ट को बाहर निकालता है
प्रकाश संश्लेषण पृथ्वी पर जीवन का आधार है
निष्कर्ष (Conclusion)
जैव प्रक्रम अध्याय जीव विज्ञान की आधारशिला है, जो हमें यह समझने में मदद करता है कि जीवित प्राणी कैसे कार्य करते हैं और अपने जीवन को बनाए रखते हैं। इस अध्याय की स्पष्ट समझ से छात्र न केवल परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं, बल्कि जीवन की वैज्ञानिक समझ भी विकसित कर सकते हैं।







